मर्यादा, भटकन और वापसी: रौशनी की वो अधूरी दास्तां जिसने उसे ‘पूरा’ कर दिया
कहते हैं, जीवन की नींव बचपन में ही पड़ जाती है। रौशनी अभी महज 3 साल की ही थी कि […]
कहते हैं, जीवन की नींव बचपन में ही पड़ जाती है। रौशनी अभी महज 3 साल की ही थी कि […]
प्यार और दौलत की दुनिया अक्सर एक-दूसरे से टकराती है, लेकिन जब इसमें असुरक्षा और अहंकार का ज़हर घुल जाए,
नंदिनी, 16 साल की किशोरी, जिसकी खूबसूरती कमल के फूल-सी थी। 5 फीट 2 इंच की ऊंचाई, मस्ती भरी आंखें,
शंकर एक साधारण गांव का लड़का था, जो उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव शिवपुर से निकलकर लखनऊ की चकाचौंध
गर्मी की छुट्टियों में, बारहवीं की परीक्षा के बाद, मेरा मन दोस्तों और इंटरनेट की दुनिया में रमा रहता था।