सपना की जिंदगी: सिंदूर की आस और जिस्म की भूख

गांव की वो टूटी-फूटी गलियां, जहां राधेश्याम जी और पार्वती बाई सुबह-सुबह मजदूरी के लिए निकल पड़ते। दोनों दिन-रात खटते, कभी ईंटें ढोते, कभी खेतों में हल चलाते। पैसा कभी मिलता, कभी नहीं, लेकिन सपना और उसके भाई कमलेश का पेट पालना था। अच्छे से पढ़ाया-लिखाया, स्कूल भेजा, लेकिन दोनों भाई-बहन को पढ़ाई समझ ही नहीं आती। नाम के लिए स्कूल जाते, लेकिन आठवीं में फेल हो गए। मां-बाप रोए-धोए, बोले – “हम तो जान लगा देते हैं बेटा, लेकिन तुम कोशिश ही नहीं करते!”

रिश्तों की तलाश और सगाई का सपना

फिर क्या, रिश्तेदारों से बात हुई, समाज में रिश्ते ढूंढे। कमलेश की सगाई कहीं और पक्की हो गई। सपना की सगाई सुनील से। सुनील के मां-बाप कैलाश जी और कुशाल बाई – वाह साहब, अमीर घराने! बड़ा परिवार, हरा-भरा, जैसे कोई राजघराना। सपना खुश हो गई – “पढ़ाई नहीं की, लेकिन किस्मत ने साथ दिया। अच्छे घर जा रही हूं!”

सगाई के बाद फोन पर बातें शुरू। सपना ने सुनील को शहर बुलाया। घूमे-फिरे, बाजारों में मजे किए। फिर सपना बोली – “चलो होटल चलें, अपन संबंध बनाते हैं। जिस्म की आग बुझाते हैं।” सुनील ने मना कर दिया – “नहीं सपना, शादी से पहले ये सब पाप है। शादी के बाद करेंगे सबकुछ।” दोनों ने बस खाना खाया, हंस-खेल के घर लौट आए। सपना सोचने लगी – “मेरा होने वाला पति तो बड़ा समझदार है, केयर करने वाला!”

शादी की ठंडी रातें और ठंडा मौसम का मिलन

फिर समाज में एक शादी थी, ठंड का मौसम। सपना और सुनील मिले। सपना ने फिर कोशिश की – “सुनील, प्लीज… शादी से पहले ही सेक्स कर लो मेरे साथ। मुझे तलब लगी है, जिस्म जल रहा है।” सुनील ने साफ मना कर दिया। शादी निपटाकर घर चला गया।

आखिरकार शादी हो गई। मां-बाप खुश – “हमारी बेटी अमीर घर जा रही है, खुश रहेगी!” लेकिन सुहागरात की रात… सपना दूध का गिलास लेकर बैठी। सुनील आया और सीधा बिस्तर पर लेट गया, सो गया। सपना सोची – “शादी की थकान होगी।” अगले दिन भी यही। दो-तीन दिन ऐसे ही बीते। सुनील आता, सो जाता। सपना प्यासी की प्यासी रह जाती।

सुहागरात का कड़वा सच और जिस्म की अधूरी आग

एक रात सपना ने सोचा – “ये मेरा हक है!” उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए, सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई। सुनील के कपड़े भी खोले। अंडरवियर उतारी, तो पता चला – वो मर्दाना कड़कपन नहीं आ रहा। लिंग बच्चे जैसा लटका रहा, कोई आकर्षण नहीं, कोई ताकत नहीं। सपना रो पड़ी, खुद को कोसा। सुनील सो गया, लेकिन सपना ने कोशिश की – लिंग को हाथ से जगाने की, मुँह से, हर तरीके से। लेकिन सुनील में वो फीलिंग ही नहीं थी। लिंग में कोई हरकत नहीं, बस ठंडा पड़ा रहा।

रो-रोकर सपना ने सास-ससुर कैलाश जी, कुशाल बाई और नंद को बताया। सब चौंक गए। लेकिन अच्छे लोग थे। बोले – “बेटा, चिंता मत कर। सुनील का इलाज करवाएंगे। डॉक्टर से दिखाएंगे, वो तेरे लायक बनेगा।”

इलाज की कोशिशें और सपना की टूटती उम्मीद

इलाज शुरू हुआ। सपना रोज कोशिश करती – रात को सुनील के साथ लेटती, उसके लिंग को छूती, सहलाती, जगाने की हर तरकीब आजमाती। लेकिन 2-3 साल बीत गए, कुछ नहीं हुआ। सुनील का वो ठंडापन नहीं गया। सपना टूट गई, मायके लौट आई। गरीब मां-बाप के साथ मजदूरी करने लगी। सुनील से फोन पर बात करती, झूठी तसल्ली देती – “कुछ देसी नुस्खे आजमा लो, सब ठीक हो जाएगा।”

दीपक का साथ और जिस्म की भूख का सिलसिला

लेकिन जिस्म की भूख तो जल रही थी। गांव में दीपक था – पिकअप चलाता, खुद की गाड़ी। शक्ल-सूरत साधारण, काला रंग। सपना ने नंबर लिया, कॉल किया – “पति बाहर है, मिलना है।” दीपक ले आया शहर। होटल में कमरा लिया। सपना ने अपनी सारी प्यास बुझाई – दीपक के साथ बेइंतहा संबंध बनाए। वो भूखी थी, तो दीपक को पूरा निचोड़ डाला। दीपक ने भी भरपूर साथ दिया – घंटों तक सेक्स किया, हर पोजिशन में, सपना की चीखें निकलवाईं, लेकिन मजा दोनों को आया। सपना ऊपर चढ़ी, नीचे लेटी, हर तरीके से अपनी हवस मिटाई।

आए दिन ऐसा ही चलता रहा। सुनील से बात करती, सिंदूर भरती, लेकिन दीपक के साथ जिस्म की आग बुझाती। आस लगाए रहती कि पति कभी ठीक हो जाएगा।

दीपक का नशा और झगड़े का तूफान

एक दिन दीपक ने ज्यादा शराब पी। जंगल में बुलाया – “चद्दर बिछाकर करेंगे।” सपना गई, क्योंकि भूख लगी थी। संबंध बनाए – दीपक ने सपना को जमकर , सपना ने भी पूरा मजा लिया। फिर दीपक बोला – “मुझसे शादी कर ले।” सपना ने समझाया – “नहीं, मैं सिर्फ जिस्म की भूख मिटा रही हूं। मेरी मांग में किसी और का सिंदूर है। तू भी तो बस मजा ले रहा है।” झगड़ा हुआ। दीपक ने नशे में हाथ उठाया, थप्पड़ मारे। सपना किसी तरह भागी, घर आई। किसी को नहीं बताया।

वापसी की राह और खुशी की लौट

सुनील से बोली – “मुझे तुम्हारे पास ही रहना है। जैसे भी रखोगे, मैं रह लूंगी।” सुनील बोला – “ठीक है। पापा बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। बचपन की गलती से नस दब गई थी, अब ब्लड सर्कुलेशन ठीक हो रहा है। मैं सही हो जाऊंगा।”

सपना खुश हो गई। फोन फोड़ दिया, प्रार्थना करने लगी। 6 महीने बाद सुनील ठीक हो गया! वो मर्दाना ताकत लौट आई। सपना की जिंदगी में खुशी लौट आई। सास-ससुर, भगवान सबका शुक्रिया अदा किया। अब वो पति के साथ जीने लगी, वो सारे संबंध बनाए जो पहले अधूरे रह गए थे।

कहानी से सीख

भाई, जिंदगी में सब्र का फल मीठा होता है। सपना ने क्या नहीं देखा – गरीबी, फेलियर, शादी का सपना टूटना, जिस्म की आग, गलत रास्ते… लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। सिंदूर की इज्जत रखी, पति पर भरोसा रखा। और देखो, भगवान ने सुनील को ठीक कर दिया।

सीख ये है –

  • पढ़ाई-लिखाई छोड़ो मत, वरना जिंदगी मुश्किल बन जाती है।
  • शादी से पहले और बाहर संबंध मत बनाओ, पाप लगता है और दिल टूटता है।
  • पति-पत्नी का रिश्ता सिर्फ जिस्म का नहीं, दिल और भरोसे का होता है।
  • अगर समस्या है, तो इलाज कराओ, भागो मत।
  • और सबसे बड़ी बात – उम्मीद मत छोड़ो। भगवान ऊपर बैठा है, वो सब देखता है। जो सही रास्ते पर रहता है, उसकी सुनता है।

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