एक अधूरी रात की गलती: राधा और श्याम की सच्ची प्रेम कहानी

राधा एक ऐसे परिवार से थी जहाँ संस्कार और परंपरा ही सब कुछ थे। उसके पिता एक मेहनती बढ़ई (carpenter) थे, जो लकड़ी के नक्काशीदार दरवाजे और खिड़कियां बनाकर अपना घर चलाते थे। घर में पैसों की कमी नहीं थी, लेकिन पुरानी सोच की जंजीरें थीं। गाँव की प्रथा के अनुसार, राधा की शादी बचपन में ही पास के गाँव के एक लड़के, राजेश से कर दी गई थी। गौना (विदाई) होना बाकी था, इसलिए राधा अभी अपने मायके में रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी। राधा ने दुनिया नहीं देखी थी; उसका जीवन कॉलेज से घर और घर से कॉलेज तक ही सीमित था।

वह तूफानी मुलाकात

एक दिन कॉलेज से लौटते समय बस में बहुत भीड़ थी। राधा को एक सीट मिली, जिस पर पहले से एक युवक बैठा था—उसका नाम श्याम था। श्याम एक दवा की फैक्ट्री (Pharmaceutical Factory) में मामूली काम करता था और अपने परिवार की जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा हुआ था। उसका जीवन संघर्षों से भरा था।

बस में दोनों पास-पास बैठे थे। श्याम को एक स्टॉप पीछे उतरना था और राधा को एक स्टॉप आगे, लेकिन उस छोटे से सफर में दोनों की निगाहें मिलीं। दोनों को ऐसा लगा जैसे यह पहचान आज की नहीं, बल्कि कई जन्मों पुरानी है। एक अजीब सा खिंचाव था जिसने दोनों को जकड़ लिया।

बातों-बातों में वक्त का पता ही नहीं चला। जब श्याम के उतरने का समय आया, तो वह नहीं उतरा। राधा भी अपने स्टॉप पर नहीं उतरी। एक अनजाने आकर्षण में बंधकर दोनों अगले स्टॉप पर उतर गए।

वह सर्द रात और एक गलती

दोनों ने एक कॉफी शॉप में वक्त बिताया। जब वे बाहर निकले, तो कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। रात गहरी हो चुकी थी। अचानक, श्याम की तबीयत बिगड़ गई। उसे ठंड लग गई और तेज बुखार चढ़ गया। राधा, जिसका दिल कोमल था, उसे सड़क पर छोड़कर नहीं जा सकी। वह उसे पास के एक क्लिनिक ले गई, जहाँ डॉक्टर ने उसे आराम करने की सलाह दी।

बाहर कोहरा और ठंड इतनी थी कि कोई बस नहीं मिल रही थी। राधा ने घर पर झूठ बोल दिया कि वह अपनी सहेली के घर रुक रही है। श्याम की हालत देख राधा ने पास के एक होटल में कमरा लिया। श्याम ने मना किया, “राधा, तुम एक कुंवारी लड़की हो (उसे राधा की शादी का पता नहीं था), समाज क्या कहेगा?” लेकिन राधा ने उसकी परवाह नहीं की।

उस रात, होटल के बंद कमरे में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। श्याम के कहने पर और माहौल के असर में, राधा भी कमजोर पड़ गई। उस एक रात, दोनों ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं और शारीरिक संबंध बना लिए। यह एक पल का आवेग (impulse) था, जिसने उनकी जिंदगी बदलने की नींव रख दी।

अगली सुबह, श्याम ने राधा को बस में बैठाकर विदा किया। दोनों ने नंबर बदले और फोन पर बातें होने लगीं।

सस्पेंस और मुसीबत

कहानी में असली मोड़ तब आया जब डेढ़ महीने बाद राधा को उल्टियां होने लगीं। जब उसने जांच की, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई—वह गर्भवती थी।

राधा के लिए यह खबर किसी मौत के फरमान से कम नहीं थी।

  1. उसकी बचपन में शादी हो चुकी थी।
  2. दो महीने बाद उसका ‘गौना’ था और उसे अपने ससुराल जाना था।
  3. पेट में पल रहा बच्चा उसके पति राजेश का नहीं, बल्कि श्याम का था।

राधा की स्थिति “इधर कुआं, उधर खाई” वाली हो गई थी। वह न तो अपने माता-पिता को बता सकती थी और न ही श्याम को तुरंत कुछ सूझ रहा था। श्याम खुद गरीब था, उसके पास न रहने का पक्का ठिकाना था, न राधा को रखने की हिम्मत।

प्रायश्चित और निर्णय

राधा ने हिम्मत करके श्याम को बताया। श्याम घबरा गया, “राधा, मैं एक मामूली वर्कर हूँ, मैं तुम्हें वो सुख नहीं दे पाऊंगा जिसकी तुम हकदार हो, लेकिन मैं अपनी गलती मानता हूँ।”

अंततः, राधा ने एक ऐसा कदम उठाया जो बहुत जोखिम भरा था। उसने अपने पति राजेश को फोन किया और उसे सब सच बता दिया। राधा रोती रही, “राजेश जी, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। मैं आपकी पत्नी बनने लायक नहीं रही। मेरे पेट में किसी और का बच्चा है।”

राजेश एक सुलझा हुआ इंसान था। उसे पहले बहुत गुस्सा आया, उसे धक्का लगा। लेकिन उसने सोचा कि अगर राधा ससुराल आ गई और बाद में यह बात खुली, तो दोनों परिवारों की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। राजेश ने राधा से मिलकर उसे ढांढस बंधाया। उसने कहा, “राधा, गलती तुमसे हुई है, लेकिन जबरदस्ती थोपे गए रिश्ते का बोझ मैं भी नहीं उठाना चाहता।”

संघर्ष और नया जीवन

राजेश ने बड़प्पन दिखाते हुए राधा के माता-पिता और पंचायत को समझाया। बहुत हंगामा हुआ, राधा के पिता ने उसे घर से निकालने की बात कह दी। समाज ने थू-थू की। राधा, जो कल तक एक इज्जतदार घर की बेटी थी, आज सबके लिए कलंक बन गई थी।

अंत में, राजेश ने श्याम को बुलाया। श्याम ने सबके सामने राधा का हाथ थामने की कसम खाई। राजेश ने राधा को श्याम के हवाले कर दिया।

राधा ने अपना घर, अपनी सुख-सुविधा और माता-पिता का प्यार—सब कुछ उस एक गलती के कारण खो दिया। श्याम और राधा की शादी हो गई, लेकिन “जंगल में मंगल” जैसा नहीं था। श्याम की नौकरी छोटी थी, और अब एक गर्भवती पत्नी और आने वाले बच्चे की जिम्मेदारी थी। राधा, जिसने कभी अभाव नहीं देखा था, अब छोटे से किराए के कमरे में रहती थी। उसे घर के काम करने पड़ते थे, तंगी में जीना पड़ता था।

लेकिन, श्याम ने अपना वादा निभाया। उसने फैक्ट्री में डबल शिफ्ट में काम किया, राधा का इलाज करवाया और उसे कभी उस गलती का ताना नहीं मारा। राधा ने भी अपने पुराने ऐशो-आराम को भुलाकर श्याम के संघर्ष में उसका साथ दिया।


कहानी से सीख (Moral of the Story)

  1. संयम (Self-Control) का महत्व: जीवन में एक पल की कमजोरी या बहकावा (जैसे होटल वाली रात) आपकी पूरी जिंदगी और परिवार की इज्जत को दांव पर लगा सकता है। प्रेम और आकर्षण में अंतर समझना जरूरी है।
  2. सच की ताकत: राधा ने अगर राजेश से सच नहीं बोला होता और वह ससुराल चली जाती, तो उसका जीवन नरक बन जाता। सच कड़वा होता है और मुसीबत लाता है, लेकिन वही आपको सही रास्ते पर ले जाता है।
  3. जिम्मेदारी: श्याम ने गलती की, लेकिन भागने के बजाय उसने जिम्मेदारी उठाई। सच्चा मर्द वही है जो अपनी गलती सुधारे और साथ निभाए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

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