शारदा की भूल और रवि का सच्चा प्रेम: मालवा की एक अनकही दास्तान

मालवा की एक दिल दहला देने वाली प्रेम कहानी

मालवा के एक छोटे से गांव की यह बात है। यहाँ शारदा नाम की एक युवती रहती थी। वह कद-काठी में बहुत लंबी और मजबूत थी। वह गांव की साधारण लड़कियों से बिल्कुल अलग दिखती थी। शारदा अपने बचपन के दोस्त रवि से बहुत प्यार करती थी। रवि भी उस पर अपनी जान छिड़कता था। लेकिन, इस प्यार के पीछे शारदा की एक अनकही भूख छिपी थी।

शारदा का भटकाव और शारीरिक भूख

शारदा एक हट्टी-कट्टी लड़की थी। उसे अपनी शारीरिक बनावट के अनुसार एक ताकतवर पुरुष की जरूरत थी। वह चाहती थी कि कोई उसे शारीरिक रूप से पूरी तरह झकझोर दे। लेकिन, रवि एक बहुत ही सीधा और सामान्य शरीर वाला लड़का था। रवि उसे दिल से प्यार तो करता था, मगर वह उसे वह चरम सुख नहीं दे पाता था जिसकी शारदा को चाह थी।

इसी वजह से शारदा का मन गंदी राहों पर चलने लगा। जब घर सुना होता, तब वह अपने से बड़ी उम्र के शादीशुदा मर्दों को बुलाती थी। वह अक्सर पड़ोस के ताकतवर और हष्ट-पुष्ट पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाती थी। वह बस यह देखना चाहती थी कि कौन उसे बिस्तर पर सबसे ज्यादा सुख दे सकता है। वह कई अनजान पुरुषों के साथ भी हमबिस्तर हुई ताकि वह अपनी आत्मा और शरीर की आग बुझा सके। वह अक्सर सोचती थी कि क्या कोई ऐसा मर्द है जो उसे पूरी तरह संतुष्ट कर पाएगा?

एक गलत कदम और धोखा

शारदा के घरवाले उसकी शादी तय कर रहे थे। लेकिन शारदा को लगा कि रवि के साथ उसकी प्यास कभी नहीं बुझेगी। इसलिए, वह एक रात गांव के ही अपने से 10 साल बड़े एक व्यक्ति के साथ भाग गई। उसे लगा कि वह उम्रदराज आदमी उसे वह हर सुख देगा जो वह चाहती है।

वहां उस व्यक्ति ने शारदा के शरीर का जी भरकर इस्तेमाल किया। उसने शारदा के साथ कई बार बेतहाशा शारीरिक संबंध बनाए। लेकिन, कुछ ही दिनों में शारदा का शरीर थक गया और उसका मन टूट गया। उसे अहसास हुआ कि वहां प्यार नाम की कोई चीज नहीं थी। वह व्यक्ति सिर्फ शारदा की मजबूती का फायदा उठा रहा था। उसने शारदा को एक खिलौने की तरह इस्तेमाल किया और फिर बेसहारा छोड़ दिया।

सच्चा प्रेम और नई शुरुआत

जब उस व्यक्ति ने शारदा को छोड़ दिया, तब उसे रवि की याद आई। उसे महसूस हुआ कि रवि का प्रेम ही सच्चा था। शारदा ने अपनी गलती मानी और रवि को एक पत्र लिखा। उसने पत्र में साफ कहा कि उसे अब वह शारीरिक सुख नहीं चाहिए, सिर्फ रवि का साथ चाहिए।

रवि ने बड़े दिल का परिचय दिया। उसने समाज के तानों की परवाह नहीं की और शारदा को अपना लिया। आज वे दोनों मालवा में एक सुखी जीवन बिता रहे हैं। उनका एक छोटा बच्चा है। शारदा पापड़ की फैक्ट्री में काम करती है और रवि एक ऑपरेटर है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा सुख शरीर में नहीं, बल्कि वफादारी और प्रेम में होता है।
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