जबरदस्ती की शादी से सच्चे प्यार तक: विद्या की अनोखी दास्तां

क्या एक लड़की की किस्मत सिर्फ ‘प्रथा’ के नाम पर खराब कर देनी चाहिए? विद्या ने समाज की जंजीरें तोड़ीं और अपना रास्ता खुद चुना।


1. सपनों का पिंजरा

विद्या एक गाँव में रहती थी। वह बचपन से ही बहुत खूबसूरत थी। उसका सपना था कि उसे एक अच्छा हमसफर मिले। ऐसा साथी जो उसे समझे और प्यार करे। लेकिन, गाँव के हालात अलग थे। वहाँ बचपन में ही शादी करने की प्रथा थी।

विद्या के पिता एक शिक्षक थे। फिर भी, वे समाज की इस पुरानी प्रथा से हार गए। नतीजतन, विद्या की शादी बचपन में ही कर दी गई। उसका पति अनिल उससे उम्र में 8 साल बड़ा था। हालाँकि, विद्या गौना होने तक अपने मायके में ही रही।

2. सौरभ: एक नई उम्मीद

विद्या पढ़ाई के लिए पास के कस्बे के स्कूल में जाती थी। वहाँ उसकी मुलाकात सौरभ से हुई। धीरे-धीरे, दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। सौरभ विद्या को बहुत चाहता था। विद्या भी सौरभ को अपना जीवनसाथी बनाना चाहती थी।

दरअस्ल, विद्या अपने पति को पसंद नहीं करती थी। क्योंकि, उनकी सोच और उम्र में बहुत अंतर था। इसलिए, विद्या और सौरभ एक-दूसरे के करीब आ गए। वे दोनों एक साथ जिंदगी बिताने के सपने देखने लगे।

3. वो डरावनी रात

जब विद्या 18 साल की हुई, तो उसे ससुराल भेज दिया गया। उसका पति अनिल एक गार्ड था। वह शरीर से पहलवान जैसा दिखता था। दूसरी तरफ, विद्या बहुत नाज़ुक थी। सुहागरात पर अनिल ने जबरदस्ती करने की कोशिश की।

विद्या ने इसका विरोध किया। उसने कहा कि वह अभी तैयार नहीं है। परंतु, अनिल ने उसकी एक नहीं सुनी। उसने विद्या के साथ पूरी रात बुरा बर्ताव किया। इस कारण, विद्या बीमार पड़ गई। वह कई दिनों तक सदमे में रही।

4. बगावत का फैसला

कुछ दिनों बाद, विद्या किसी त्यौहार पर अपने घर वापस आई। उसने सौरभ को सब कुछ बताया। विद्या ने कहा, “मुझे वहाँ नहीं रहना है। तुम मुझे यहाँ से ले चलो।” इसके बाद, सौरभ ने अपने घर पर बात की।

लेकिन, सौरभ के माता-पिता ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि लड़की शादीशुदा है। इसलिए, वे इस रिश्ते को नहीं मानेंगे। विद्या और सौरभ के पास कोई रास्ता नहीं था। आखिरकार, दोनों ने भागने का फैसला किया।

5. संघर्ष और जीत

वे दोनों घर छोड़कर भाग गए। उन्होंने एक लॉज में कमरा लिया। शुरुआत में, उन्हें बहुत मुश्किलें आईं। विद्या की तबीयत भी खराब थी। सौरभ ने उसका पूरा इलाज करवाया। उसने विद्या का हर कदम पर साथ दिया।

पेट भरने के लिए सौरभ ने एक कंपनी में काम किया। भले ही पैसे कम थे, पर वे खुश थे। बाद में, उन्होंने मंदिर में शादी कर ली। अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने कोर्ट मैरिज भी की।

6. एक नई शुरुआत

जब हालात ठीक हुए, तो विद्या ने अपने पिता को खत लिखा। उसने बताया कि वह अपनी पुरानी जिंदगी में खुश नहीं थी। अब, वह सौरभ के साथ बहुत खुश है। सौरभ के परिवार ने भी उन्हें अपना लिया है।

फिलहाल, विद्या सिलाई का काम करती है। उनके पास एक प्यारा सा बच्चा भी है। सच में, विद्या ने अपनी हिम्मत से अपनी किस्मत बदल दी।

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