
Emotional Love Story in Hindi: प्यार एक खूबसूरत अहसास है। लेकिन, कभी-कभी सच्ची मोहब्बत को कड़ी परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। आज हम आपको कबीर और अनन्या की कहानी सुनाएंगे। यह कहानी साबित करती है कि प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं है। बल्कि, प्यार का असली मतलब त्याग है।
कबीर और अनन्या की पहली मुलाकात
कबीर एक बहुत ही होनहार पेंटर था। वह अपनी पेंटिंग में जान डाल देता था। दूसरी तरफ, अनन्या एक बहुत ही सुंदर लड़की थी। हालाँकि, अनन्या के जीवन में अँधेरा था। वह बचपन से देख नहीं सकती थी।

एक दिन कबीर एक पार्क में पेंटिंग कर रहा था। तभी, उसकी नज़र अनन्या पर पड़ी। वह एक बेंच पर बैठी थी। कबीर उसे देखता ही रह गया। फिर, कबीर ने हिम्मत करके उससे बात की। अनन्या की बातों में एक अलग ही जादू था। इसलिये, कबीर पहली ही मुलाकात में अपना दिल हार बैठा।
दोस्ती प्यार में बदल गई
धीरे-धीरे उनकी मुलाकातें बढ़ने लगीं। कबीर, अनन्या की “आँखें” बन गया। वह उसे दुनिया की हर खूबसूरती के बारे में बताता था। जैसे कि, फूलों का रंग कैसा है और आसमान कितना नीला है। अनन्या को कबीर के साथ बहुत सुरक्षित महसूस होता था। नतीजतन, दोनों को एक-दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत हो गई।

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कहानी में आया नया मोड़ (Suspense)
सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था। लेकिन, किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। अनन्या हमेशा कबीर को देखना चाहती थी। कबीर ने कसम खाई थी कि वह अनन्या की आँखों का इलाज करवाएगा। आखिरकार, वह दिन आ ही गया।

डॉक्टर ने कबीर को बताया कि अनन्या का ऑपरेशन हो सकता है। परंतु, इसके लिए किसी को अपनी आँखें दान करनी होंगी। कबीर यह सुनकर बहुत खुश हुआ। उसने डॉक्टर से कुछ बात की और बाहर आ गया। फिर, वह अनन्या के पास गया और उसका हाथ थाम लिया।
कबीर ने कहा, “अनन्या, तुम बहुत जल्द यह दुनिया देखोगी। बस मुझसे एक वादा करो। तुम हमेशा खुश रहोगी।” अनन्या को कबीर की आवाज़ में एक अजीब सा दर्द महसूस हुआ। लेकिन, वह कुछ समझ नहीं पाई।
ऑपरेशन और कबीर का गायब होना
ऑपरेशन का दिन आ गया। अनन्या को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। ऑपरेशन कई घंटों तक चला। सौभाग्य से, ऑपरेशन सफल रहा। अनन्या की आँखों पर पट्टियां बंधी थीं। वह बस कबीर से मिलने के लिए बेचैन थी।
कुछ दिनों बाद पट्टियां खोलने का वक्त आया। डॉक्टर ने धीरे-धीरे अनन्या की आँखों से पट्टी हटाई। अनन्या ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। अब, वह सब कुछ देख सकती थी। उसने सबसे पहले कबीर को ढूंढा। मगर, कबीर वहां कहीं नहीं था।
वो खत जिसने सबको रुला दिया
अनन्या ने घबराकर डॉक्टर से पूछा, “कबीर कहाँ है?” डॉक्टर की आँखों में आंसू थे। उन्होंने अनन्या के हाथ में एक चिट्ठी थमा दी। साथ ही, उन्होंने बताया कि कबीर अब इस दुनिया में नहीं है।

अनन्या के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने कांपते हाथों से चिट्ठी पढ़ी।
चिट्ठी में लिखा था: “मेरी प्यारी अनन्या, तुमने हमेशा कहा था कि तुम दुनिया देखना चाहती हो। इसलिए, मैं तुम्हें अपनी आँखें देकर जा रहा हूँ। मुझे ब्रेन ट्यूमर था। मेरे पास जीने के लिए बहुत कम वक्त बचा था। लिहाजा, मैंने जाने से पहले तुम्हें रोशनी देने का फैसला किया। अब तुम मेरी आँखों से ही मुझे इस दुनिया में देखोगी।”
कहानी से सीख (Moral of the Story)
अनन्या फूट-फूट कर रोने लगी। लेकिन, अब वह कबीर को वापस नहीं ला सकती थी। उसने कबीर के वादे को निभाया और खुश रहने की कोशिश की।
सीख: सच्चा प्यार जिस्म से नहीं, रूह से होता है। जो आपसे सच्चा प्रेम करता है, वह आपकी खुशी के लिए अपनी जान भी दे सकता है।
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