वो आखिरी शर्त: प्यार, नफरत और एक अधूरा सच (Heart Touching Love Story in Hindi)

क्या प्रेम सिर्फ साथ रहने का नाम है? या फिर प्रेम का असली मतलब किसी की खुशी के लिए खुद को मिटा देना है? आज की यह कहानी रोहन और सिया की है। एक ऐसी कहानी जिसमें प्यार था, तड़प थी और एक ऐसा सस्पेंस (Suspense) जिसने रोहन की पूरी दुनिया बदल दी।

बनारस के घाट और दो दिल

बनारस की गलियों में रोहन और सिया की दोस्ती मशहूर थी। रोहन एक मध्यम वर्गीय परिवार का लड़का था, जिसके पास सपने तो बड़े थे, लेकिन जेब खाली थी। वहीं सिया शहर के सबसे रईस बिजनेसमैन की बेटी थी।

दोनों में गहरा प्रेम था। वे अक्सर गंगा घाट पर बैठकर घंटों बातें किया करते थे। रोहन अक्सर सिया से कहता, “एक दिन मैं दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनूँगा और तुम्हें रानी बनाकर रखूँगा।” सिया बस मुस्कुरा देती। उसे पैसों से नहीं, रोहन के समय और साथ से प्यार था।

वो काली शाम और सिया का बदला रूप

सब कुछ ठीक था। लेकिन उसी शाम सब बदल गया। रोहन ख़ुश था, क्योंकि उसे एक छोटी नौकरी मिली थी। इसलिए वह सिया से मिलने उसके घर पहुँचा।

लेकिन जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, माहौल अजीब लगा। सिया ने रोहन को देखा और तुरंत मुँह फेर लिया।
फिर उसने सख़्त आवाज़ में कहा:

रोहन, तुमने अपनी शक्ल देखी है? तुम जिंदगी भर एक मामूली क्लर्क ही रहोगे। मेरे पिता सही कहते थे। प्यार से पेट नहीं भरता। मुझे अब तुमसे कोई वास्ता नहीं रखना। चले जाओ यहाँ से!”

यह सुनकर रोहन सन्न रह गया।
जिस सिया ने कभी उससे ऊँची आवाज़ में बात नहीं की थी, आज वही उसे उसकी गरीबी का ताना दे रही थी।

रोहन की आँखों में आँसू आ गए।
उसने धीमी आवाज़ में कहा,
“सिया, क्या दौलत तुम्हारे लिए हमारे प्यार से बड़ी हो गई?”

लेकिन सिया ने पत्थर दिल होकर जवाब दिया,
“हाँ! मैं गरीबी में नहीं जी सकती। निकल जाओ मेरी जिंदगी से।”

रोहन का संकल्प और कामयाबी का नशा

उस रात रोहन पूरी तरह टूट गया। सिया की नफरत ने उसके दिल में आग लगा दी थी। उसने उसी रात बनारस छोड़ने का फैसला किया। उसने कसम खाई कि वह इतना पैसा कमाएगा कि सिया को अपनी गलती का पछतावा हो।

रोहन मुंबई चला गया। दिन-रात मेहनत की। भूख-प्यास सब भूल गया। उसके दिमाग में बस सिया के वो कड़वे शब्द गूँजते थे। पाँच साल बीत गए। रोहन अब रोहन नहीं, बल्कि एक बड़ा बिज़नेसमैन ‘आर. के. मेहरा’ बन चुका था। उसके पास नाम, शोहरत और बेशुमार दौलत थी। अब वक्त था बनारस लौटने का। अब वक्त था सिया को उसकी औकात दिखाने का।

बनारस वापसी और एक गहरा सन्नाटा

रोहन अपनी महंगी कार से बनारस की उन्हीं गलियों में पहुँचा। उसका मकसद साफ़ था – सिया के सामने जाना और उसे अपनी कामयाबी दिखाना।

वह सिया के घर पहुँचा। लेकिन वहाँ का नज़ारा देखकर वह हैरान रह गया। वह आलीशान कोठी अब खंडहर जैसी लग रही थी। गेट पर ताला लटका था और धूल जमी थी। रोहन का दिल जोर से धड़कने लगा। आखिर सिया कहाँ गई? क्या उसने शादी कर ली?

रोहन ने पड़ोस की दुकान पर पूछा। दुकानदार ने रोहन को पहचाना नहीं, पर सिया का नाम सुनते ही उसकी आँखों में उदासी आ गई। दुकानदार बोला, “बेटा, उस घर में अब कोई नहीं रहता। साहब (सिया के पिता) तो चार साल पहले गुज़र गए।” रोहन ने घबराते हुए पूछा, “और सिया? सिया कहाँ है?”

दुकानदार ने जो जवाब दिया, उसने रोहन के पैरों तले ज़मीन खिसका दी। “सिया बिटिया तो पाँच साल पहले ही भगवान को प्यारी हो गई थीं।”

डायरी का वो आखिरी पन्ना

रोहन को अपनी कानों पर विश्वास नहीं हुआ। “यह झूठ है!” वह चिल्लाया। तभी दुकानदार ने एक पुरानी डायरी रोहन के हाथ में थमाई और कहा, “मरने से पहले सिया ने यह डायरी मुझे दी थी और कहा था – अगर कभी रोहन वापस आए, तो उसे दे देना।”

रोहन ने कांपते हाथों से डायरी खोली। उसमें सिया की लिखावट थी। आंसुओं के कारण स्याही कई जगह फैल गई थी। उसने पढ़ना शुरू किया:

“मेरे प्यारे रोहन, जब तुम यह पढ़ रहे होंगे, मैं इस दुनिया में नहीं हूँगी। मुझे माफ़ कर देना। जिस दिन मैंने तुम्हें घर से बेइज्जत करके निकाला था, उसी दिन मुझे पता चला था कि मुझे ब्लड कैंसर है और मेरे पास सिर्फ कुछ महीने बचे हैं। मैं जानती थी कि अगर तुम्हें मेरी बीमारी का पता चलता, तो तुम अपना करियर, अपने सपने सब छोड़कर मेरी सेवा में लग जाते। तुम मेरे साथ तड़पते और मैं तुम्हें अपनी मौत के साथ मरते हुए नहीं देख सकती थी। तुम्हें मुझसे नफरत करानी ज़रूरी थी, ताकि तुम उस नफरत को अपनी ताकत बना सको और जीवन में कुछ बन सको। देखो, आज तुम कितने सफल हो। यह मेरी जीत है रोहन। तुम्हारे बिना मरना बहुत मुश्किल था, लेकिन तुम्हें कामयाब देखने का सुकून लेकर जा रही हूँ। खुश रहना… तुम्हारी सिया।”

कहानी का अंत (Conclusion)

रोहन वहीं सड़क पर घुटनों के बल बैठ गया और फूट-फूट कर रोने लगा। वह जिसे बेवफा समझकर नफरत करता रहा, उसने अपने प्यार के खातिर अपनी आखिरी सांसे भी तन्हाई में गुज़ार दीं।

रोहन जीत गया था, पर आज वह सब कुछ हार चुका था। सिया का वो ‘झूठा धोखा’ दरअसल उसका ‘सच्चा त्याग’ था।


कहानी से सीख (Moral of the Story)

यह कहानी हमें सिखाती है कि:

  1. हर फैसला वैसा नहीं होता जैसा दिखता है: कभी-कभी कड़वे शब्दों के पीछे गहरा प्यार और चिंता छिपी होती है।
  2. प्रेम का अर्थ त्याग है: सच्चा प्यार पाने की ज़िद नहीं करता, बल्कि प्रेमी की भलाई के लिए खुद को कुर्बान कर देता है।
  3. संवाद (Communication) जरूरी है: रिश्तों में गलतफहमी को कभी भी लंबी चुप्पी में नहीं बदलने देना चाहिए, वरना पछतावे के सिवा कुछ नहीं बचता।

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